

पेशे नज़र नज़्म जनाब फैज़ अहमद फैज़ साहब के अकीदों को और दुनिया के तमाम मज़लूमो की उम्मीदों को लिबासे हकीक़त पहनाते है के जिसमे फैज़ अहमद फैज़ साहब उस सुबह का ज़िक्र करते हें जिसमे दुनिया अदलो इंसाफ से भर जाएगी इमामे अस्रअलैहिस्सलाम की विलादत के अय्याम मैं इस नज़्म के ज़रिये हम नजराने अकीदत पेश करते हैं और दुनिया की हर फर्द को बता देना चाहते हैं के.......................
वो सुबह कभी तो आयेगी
इन काली सदियों के सर से जब रात का आंचल ढलकेगा
जब दुःख के बादल पिघलेंगे जब सुख का सागर झलकेगा
जब अम्बर झूम के नाचेगा जब धरती नगमे गाएगी
वो सुबह कभी तो आयेगी
जिस सुबह की खातिर जुग जुग से हम सब मर मर के जीते हैं
जिस सुबह के अमृत की धुन मे हम ज़हर के प्याले पीते हैं
इन भूकी प्यासी रूहों पर इक दिन तो करम फरामाएगी
वो सुबह कभी तो आयेगी
माना के अभी तेरे मेरे अरमानों की कीमत कुछ भी नहीं
मिटटी का भी है कुछ मोल मगर इंसानों की कीमत कुछ भी नहीं
इंसानों की इज्ज़त जब झूठे सिक्कों में न तोली जाएगी
वो सुबह कभी तो आएगी
दौलत के लिए जब औरत की इस्मत को न बेचा जायेगा
चाहत को न कुचला जायेगा , इज्ज़त को न बेचा जायेगा
अपनी काली करतूतों पर जब ये दुनिया शर्माएगी
वो सुबह कभी तो आयेगी
बीतेंगे कभी तो दिन आखिर ये भूक के और बेकारी के
टूटेंगे कभी तो बुत आखिर दौलत की इजारादारी के
जब एक अनोखी दुनिया की बुनियाद उठाई जाएगी
वो सुबह कभी तो आएगी
वो सुबह कभी तो आयेगी
इन काली सदियों के सर से जब रात का आंचल ढलकेगा
जब दुःख के बादल पिघलेंगे जब सुख का सागर झलकेगा
जब अम्बर झूम के नाचेगा जब धरती नगमे गाएगी
वो सुबह कभी तो आयेगी
जिस सुबह की खातिर जुग जुग से हम सब मर मर के जीते हैं
जिस सुबह के अमृत की धुन मे हम ज़हर के प्याले पीते हैं
इन भूकी प्यासी रूहों पर इक दिन तो करम फरामाएगी
वो सुबह कभी तो आयेगी
माना के अभी तेरे मेरे अरमानों की कीमत कुछ भी नहीं
मिटटी का भी है कुछ मोल मगर इंसानों की कीमत कुछ भी नहीं
इंसानों की इज्ज़त जब झूठे सिक्कों में न तोली जाएगी
वो सुबह कभी तो आएगी
दौलत के लिए जब औरत की इस्मत को न बेचा जायेगा
चाहत को न कुचला जायेगा , इज्ज़त को न बेचा जायेगा
अपनी काली करतूतों पर जब ये दुनिया शर्माएगी
वो सुबह कभी तो आयेगी
बीतेंगे कभी तो दिन आखिर ये भूक के और बेकारी के
टूटेंगे कभी तो बुत आखिर दौलत की इजारादारी के
जब एक अनोखी दुनिया की बुनियाद उठाई जाएगी
वो सुबह कभी तो आएगी
mashallah. Allah imam e zaman ( a.s) ka zahoor jald se jald ho aur us se pehle hamein is qabil bana de ki ham unke lashkr main shamil ho sakein.
जवाब देंहटाएंameen